लो आ गया एक और नया साल इंसानियत की धज्जियाँ उड़ाने
इस साल कोई नाबालिक का बलात्कार नही हुआ, तो कहना
कीसी दलित के साथ भेदभाव नही हुआ,तो कहना!
आ गया नया साल पूँजीपतियों की जेबें भरने
किसी गरीब का हक न छीन लिया जाए, तो कहना
पैसों लिए किसी बेगुनाह का क़त्ल न हुआ, तो कहना!
आ गया नया नया साल लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए
बड़े नेताजी ने देश को फिर से गुमराह नही किया, तो कहना
सिसायत की चपेट में आम आदमी ना कुचल दिया जाए,तो कहना!
आ गया नया साल एक और सबक सिखाने
इन सारे रिश्वतखोरों को उनकी औकात ना दिखाऊ, तो कहना
इतनी सारी जद्दोजहद के बाद भी जिंदा ना रहूँ तो कहना..!
~प्रेमकुमार शारदा ढगे
नागसेनवन, औरंगाबाद
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